ग़ज़ल

चुनिन्दा अश्आर- भाग तीन

मीर तक़ी मीर · सब कलाम देखें
२१.अपने तो होंठ भी न हिले उसके रू-ब-रूरंजिश की वजह ‘मीर’ वो क्या बात हो गई?२२.‘मीर’ साहब भी उसके याँ थे परजैसे कोई ग़ुलाम होता है२३.हम सोते ही न रह जाएँ ऐ शोरे-क़यामत !इस राह से निकले तो हमको भी जगा देना२४.मस्ती में लग़ज़िश हो गई माज़ूर रक्खा चाहिएऐ अहले मस्जिद ! इस तरफ़ आया हूँ मैं भटका हुआ२५.आने में उसले हाल हुआ जाए है तग़ईरक्या हाल होगा पास से जब यार जाएगा ?२६.बेकसी मुद्दत तलक बरसा की अपनी गोर परजो हमारी ख़ाक़ पर से हो के गुज़रा रो गया२७.हम फ़क़ीरों से बेअदाई क्याआन बैठे जो तुमने प्यार किया२९.सख़्त क़ाफ़िर था जिसने पहले ‘मीर’मज़हबे-इश्क़ अख़्तियार किया३०.आवारगाने-इश्क़ का पूछा जो मैं निशाँमुश्तेग़ुबार ले के सबा ने उड़ा दिया
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