ग़ज़ल

जो तू ही सनम हम से बेज़ार होगा

मीर तक़ी मीर · सब कलाम देखें
जो तू ही सनम हम से बेज़ार होगातो जीना हमें अपना दुशवार होगा
ग़म-ए-हिज्र रखेगा बेताब दिल कोहमें कुढ़ते-कुढ़ते कुछ आज़ार होगा
जो अफ़्रात-ए-उल्फ़त है ऐसा तो आशिक़कोई दिन में बरसों का बिमार होगा
उचटती मुलाक़ात कब तक रहेगीकभू तो तह-ए-दिल से भी यार होगा
तुझे देख कर लग गया दिल न जानाके इस संगदिल से हमें प्यार होगा
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