ग़ज़ल

गुल ब बुलबुल बहार में देखा

मीर तक़ी मीर · सब कलाम देखें
गुल ब बुलबुल बहार में देखाएक तुझको हज़ार में देखा
जल गया दिल सफ़ेद हैं आखेंयह तो कुछ इंतज़ार में देखा
आबले का भी होना दामनगीरतेरे कूचे के खार में देखा
जिन बालाओं को 'मीर' सुनते थेउनको इस रोज़गार में देखा
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