ग़ज़ल
कुछ करो फ़िक्र मुझ दीवाने की
कुछ करो फ़िक्र मुझ दीवाने कीधूम है फिर बहार आने की
वो जो फिरता है मुझ से दूर ही दूरहै ये तरकीब जी के जाने की
तेज़ यूँ ही न थी शब-ए-आतिश-ए-शौक़थी खबर गर्म उस के आने की
जो है सो पाइमाल-ए-ग़म है मीरचाल बेडोल है ज़माने की
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