ग़ज़ल
कारे कारे सबसे बुरे ओधव प्यारे
कारे कारे सबसे बुरे ओधव प्यारे॥ध्रु०॥कारेको विश्वास न कीजे अतिसे भूल परे॥१॥काली जात कुजात कहीजे। ताके संग उजरे॥२॥श्याम रूप कियो भ्रमरो। फुलकी बास भरे॥३॥मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। कारे संग बगरे॥४॥
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