ग़ज़ल
कालोकी रेन बिहारी
कालोकी रेन बिहारी। महाराज कोण बिलमायो॥ध्रु०॥काल गया ज्यां जाहो बिहारी। अही तोही कौन बुलायो॥१॥कोनकी दासी काजल सार्यो। कोन तने रंग रमायो॥२॥कंसकी दासी काजल सार्यो। उन मोहि रंग रमायो॥३॥मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। कपटी कपट चलायो॥४॥
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