ग़ज़ल

अपनी गरज हो मिटी

मीराबाई · सब कलाम देखें
अपनी गरज हो मिटी सावरे हाम देखी तुमरी प्रीत॥ध्रु०॥आपन जाय दुवारका छाय ऐसे बेहद भये हो नचिंत॥ ठोर०॥१॥ठार सलेव करित हो कुलभवर कीसि रीत॥२॥बीन दरसन कलना परत हे आपनी कीसि प्रीत।मीराके प्रभु गिरिधर नागर प्रभुचरन न परचित॥३॥
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh