ग़ज़ल
आनन पूरनचंद लसै
आनन पूरनचंद लसै अरबिंद –बिलास- बिलोचन पेखे .
अंबर पीत लसै चपला छबि अम्बुद मेचक अंग उरेखे .
कामहूँ ते अभिराम महा ‘मतिराम’ हिये निहचै करि लेखे .
तैं बरनै निज नैनन सों, सखी मैं निज नैनन सौं जनु देखे .
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.