ग़ज़ल

सुबन को मेटि दिल्ली देस दलिबे को चूम

मतिराम · सब कलाम देखें
सुबन को मेट दिल्ली देस दलिबे को चूम,सुभट समूह निसि वाकी उमहति है.कहै मतिराम ताहि रोकिबे को संगर में,काहू के हिम्मत हिए में उलहति है.सत्रुसाल नन्द के प्रताप की लपट सब,जरब गनीम बरगीन को दहति है.पति पातसाह की,इजति उमरावन की,राखी रैया राव भावसिंह की रहति है.
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