ग़ज़ल
याही को पठाई बड़ो काम करि आई बड़ी
याही को पठाई बड़ो काम करि आई बड़ी ,तेरी है बड़ाई लख्यो लोचन लजीले सोँ ।साँची क्योँ न कहै कछु मोको किधौँ आपु ही को ,पाई बकसीस लाई बसन छबीले सोँ ।कवि मतिराम मोसो कहत सँदेसो ऊन ,भरे नख शिख अँग हरख कटीले सोँ ।तू तो है रसीली रस बातन बनाय जानै ,मेरे जान आई रस राखि कै रसीले सोँ ॥
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