ग़ज़ल

बरज्यो न मानत है बार बार बरज्यो मैं

मतिराम · सब कलाम देखें
बरज्यो न मानत है बार बार बरज्यो मैँ ,कौन काम मेरे इत भौन मैँ न आइए ।लाज को न लेस जग हँसी को न डर मन ,हँसत हँसत आन बात न बनाइए ।कवि मतिराम नित उठ कलकानि करौ ,नित झूठी सौँहैँ करो नित बिसराइए ।ताके पग लागौ निस जागि जाके उर लागे ,मेरे पग लागि उर आगि न लगाइए ।
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh