ग़ज़ल

सोय रहि रति-अन्त रसीली

मतिराम · सब कलाम देखें
सोय रहि रति-अन्त रसीली, अनन्द बढ़ाय अनंग-तरंगनि।केसरि खौर करी तिय के तन, प्रीतम और सुवास के संगनि।।जागि परि 'मतिराम' सरूप, गुमान जनावति भौंह के अंगनि।लाल सौं बोलति नाहिंन बाल, सुयोंछति आँखि अंगोछति भंगनि।।
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