ग़ज़ल
पायन आनि परे तो परे रहै
पाँयन आय परै तो परे रहैं केती करी मनुहारि सहेली ।मान्यो मनायो न मैँ 'मतिराम' गुमान मे ऐसी भई अलबेली ।प्यारो गयो दुख मानि कहूँ अब कैसे रहूँ यहि राति अकेली ।आजु तौ ल्याउ मनाइ कन्हाई को मेरो न लीजियो नाँव सहेली ।
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