ग़ज़ल

मोर पखा ‘मतिराम’ किरीट

मतिराम · सब कलाम देखें
मोर पखा ‘मतिराम’ किरीट मैं कंठ बनी बनमाल सुहाई .
मोहन की मुसकानि मनोहर कुंडल डोलनि मैं छबि आई .
लोचन लोल बिसाल बिलोकनि को न विलोकि भयो बस माई.
वा मुख की मधुराई कहा कहौं मीठी लगै अँखियान लुनाई .
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