ग़ज़ल
साँझ ही ते करि राखै सबै करिबे के
साँझहिं ते करि राखै सबै करिबे के काज हुते रजनी के ।पौढ़ि रही उमगी अति ही मतिराम अनन्द अमात न जी के।।सोवति जानि के लोग सबै अधिकाते बिलास-मनोरथ-नीके ।सेज ते बाल उठी हरुए हरुए पट खोलि दिए खिरकी के।।
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