ग़ज़ल

पाँव धरे दुलही जिहि ठौर रहे

मतिराम · सब कलाम देखें
पाँव धरे दुलही जिहि ठौर रहे मतिराम तहाँ दृग दीने ।छोड़ि सखान के साथ को खेलिबो बैठि रहे घर ही रस भीने ।साँझहि ते ललकैँ मन ही मन लालन योँ रस के बस लीने ।लौनी सलौनी के अँगन नाह सुगौने की चूनरी टोने से कीने ।
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