ग़ज़ल

बारनि धूपि अँगारनि धूप कैँ धूम

मतिराम · सब कलाम देखें
बारनि धूपि अँगारनि धूप कैँ धूम अँध्यारी पसारी महा है ।आनन चँद समान उगो मृदु मँद हँसी जनु जोन्ह छटा है ।फैलि रही मतिराम जहाँ तहाँ दीपति दीपनि की परभा है ।लाल ! तिहारे मिलाप को बाल ने आजु करी दिन ही मे निसा है ।
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