ग़ज़ल

होली

मैथिलीशरण गुप्त · सब कलाम देखें
जो कुछ होनी थी, सब होली!धूल उड़ी या रंग उड़ा है,हाथ रही अब कोरी झोली।आँखों में सरसों फूली है,सजी टेसुओं की है टोली।पीली पड़ी अपत, भारत-भू,फिर भी नहीं तनिक तू डोली!
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