ग़ज़ल

माँ कह एक कहानी

मैथिलीशरण गुप्त · सब कलाम देखें
"माँ कह एक कहानी।"बेटा समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?""कहती है मुझसे यह चेटी, तू मेरी नानी की बेटीकह माँ कह लेटी ही लेटी, राजा था या रानी?माँ कह एक कहानी।"
"तू है हठी, मानधन मेरे, सुन उपवन में बड़े सवेरे,तात भ्रमण करते थे तेरे, जहाँ सुरभि मनमानी।""जहाँ सुरभि मनमानी! हाँ माँ यही कहानी।"
वर्ण वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिमबिंदु झिले थे,हलके झोंके हिले मिले थे, लहराता था पानी।""लहराता था पानी, हाँ-हाँ यही कहानी।"
"गाते थे खग कल-कल स्वर से, सहसा एक हंस ऊपर से,गिरा बिद्ध होकर खग शर से, हुई पक्ष की हानी।""हुई पक्ष की हानी? करुणा भरी कहानी!"
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