ग़ज़ल

भारत माता का मंदिर यह

मैथिलीशरण गुप्त · सब कलाम देखें
भारत माता का मंदिर यहसमता का संवाद जहाँ,सबका शिव कल्याण यहाँ हैपावें सभी प्रसाद यहाँ ।
जाति-धर्म या संप्रदाय का,नहीं भेद-व्यवधान यहाँ,सबका स्वागत, सबका आदरसबका सम सम्मान यहाँ ।राम, रहीम, बुद्ध, ईसा का,सुलभ एक सा ध्यान यहाँ,भिन्न-भिन्न भव संस्कृतियों केगुण गौरव का ज्ञान यहाँ ।
नहीं चाहिए बुद्धि बैर कीभला प्रेम का उन्माद यहाँसबका शिव कल्याण यहाँ है,पावें सभी प्रसाद यहाँ ।
सब तीर्थों का एक तीर्थ यहह्रदय पवित्र बना लें हमआओ यहाँ अजातशत्रु बन,सबको मित्र बना लें हम ।रेखाएँ प्रस्तुत हैं, अपनेमन के चित्र बना लें हम ।सौ-सौ आदर्शों को लेकरएक चरित्र बना लें हम ।
बैठो माता के आँगन मेंनाता भाई-बहन कासमझे उसकी प्रसव वेदनावही लाल है माई काएक साथ मिल बाँट लोअपना हर्ष विषाद यहाँसबका शिव कल्याण यहाँ हैपावें सभी प्रसाद यहाँ ।
मिला सेव्य का हमें पुज़ारीसकल काम उस न्यायी कामुक्ति लाभ कर्तव्य यहाँ हैएक एक अनुयायी काकोटि-कोटि कंठों से मिलकरउठे एक जयनाद यहाँसबका शिव कल्याण यहाँ हैपावें सभी प्रसाद यहाँ ।
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