ग़ज़ल

आर्य

मैथिलीशरण गुप्त · सब कलाम देखें
हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभीआओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभीभू लोक का गौरव, प्रकृति का पुण्य लीला स्थल कहांफैला मनोहर गिरि हिमालय, और गंगाजल कहांसंपूर्ण देशों से अधिक, किस देश का उत्कर्ष हैउसका कि जो ऋषि भूमि है, वह कौन, भारतवर्ष है
यह पुण्य भूमि प्रसिद्घ है, इसके निवासी आर्य हैंविद्या कला कौशल्य सबके, जो प्रथम आचार्य हैंसंतान उनकी आज यद्यपि, हम अधोगति में पड़ेपर चिन्ह उनकी उच्चता के, आज भी कुछ हैं खड़े
वे आर्य ही थे जो कभी, अपने लिये जीते न थेवे स्वार्थ रत हो मोह की, मदिरा कभी पीते न थेवे मंदिनी तल में, सुकृति के बीज बोते थे सदापरदुःख देख दयालुता से, द्रवित होते थे सदा
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh