ग़ज़ल
भजो भारत को तन-मन से
भजो भारत को तन-मन से।बनो जड़ हाय! न चेतन से॥
करते हो किस इष्ट देव का आँख मूँद का ध्यान?तीस कोटि लोगों में देखो तीस कोटि भगवान।मुक्ति होगी इस साधन से।भजो भारत को तन-मन से॥
जिसके लिए सदैव ईश ने लिये आप अवतार,ईश-भक्त क्या हो यदि उसका करो न तुम उपकार।पूछ लो किसी सुधी जन से।भजो भारत को तन-मन से॥
पद पद पर जो तीर्थ भूमि है, देती है जो अन्न,जिसमें तुम उत्पन्न हुए हो करो उसे सम्पन्न।नहीं तो क्या होगा धन से?भजो भारत को तन-मन से॥
हो जावे अज्ञान-तिमिर का एक बार ही नाश,और यहाँ घर घर में फिर से फैले वही प्रकाश।जियें सब नूतन जीवन से।भजो भारत को तन-मन से॥
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh