ग़ज़ल
कर चले हम फ़िदा
कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियोअब तुम्हारे हवाले वतन साथियोसाँस थमती गई, नब्ज़ जमती गईफिर भी बढ़ते क़दम को न रुकने दियाकट गए सर हमारे तो कुछ ग़म नहींसर हिमालय का हमने न झुकने दिया
मरते-मरते रहा बाँकपन साथियोअब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगरजान देने के रुत रोज़ आती नहींहस्न और इश्क दोनों को रुस्वा करेवह जवानी जो खूँ में नहाती नहीं
आज धरती बनी है दुलहन साथियोअब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
राह कुर्बानियों की न वीरान होतुम सजाते ही रहना नए काफ़िलेफतह का जश्न इस जश्न के बाद हैज़िंदगी मौत से मिल रही है गले
बांध लो अपने सर से कफ़न साथियोअब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
खींच दो अपने खूँ से ज़मी पर लकीरइस तरफ आने पाए न रावण कोईतोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगेछू न पाए सीता का दामन कोईराम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
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