ग़ज़ल
अंदेशे
रूह बेचैन है इक दिल की अज़ीयत क्या हैदिल ही शोला है तो ये सोज़-ए-मोहब्बत क्या हैवो मुझे भूल गई इसकी शिकायत क्या हैरंज तो ये है के रो-रो के भुलाया होगा
वो कहाँ और कहाँ काहिफ़-ए-ग़म सोज़िश-ए-जाँउस की रंगीन नज़र और नुक़ूश-ए-हिरमाउस का एहसास-ए-लतीफ़ और शिकस्त-ए-अरमातानाज़न एक ज़माना नज़र आया होगा
झुक गई होगी जवाँ-साल उमंगों की जबींमिट गई होगी ललक डूब गया होगा यक़ींछा गया होगा धुआँ घूम गई होगी ज़मींअपने पहले ही घरोंदे को जो ढाया होगा
दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाये होंगेअश्क आँखों ने पिये और न बहाये होंगेबन्द कमरे में जो ख़त मेरे जलाये होंगेइक-इक हर्फ़ जबीं पर उभर आया होगा
उस ने घबरा के नज़र लाख बचाई होगीमिट के इक नक़्श ने सौ शक़्ल दिखाई होगीमेज़ से जब मेरी तस्वीर हटाई होगीहर तरफ़ मुझ को तड़पता हुआ पाया होगा
बेमहल छेड़ पे जज़्बात उबल आये होंगेग़म पशेमा तबस्सुम में ढल आये होंगेनाम पर मेरे जब आँसू निकल आये होंगेसर न काँधे से सहेली के उठाया होगा
ज़ुल्फ़ ज़िद कर के किसी ने जो बनाई होगीरूठे जलवों पे ख़िज़ाँ और भी छाई होगीबर्क़ आँखों ने कई दिन न गिराई होगीरंग चेहरे पे कई रोज़ न आया होगा
होके मजबूर मुझे उस ने भुलाया होगाज़हर चुप कर के दवा जान के ख़ाया होगा
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