ग़ज़ल
झुकी झुकी सी नज़र बेक़रार है कि नहीं
झुकी झुकी सी नज़र बेक़रार है कि नहींदबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं
तू अपने दिल की जवाँ धड़कनों को गिन के बतामेरी तरह तेरा दिल बेक़रार है कि नहीं
वो पल के जिस में मुहब्बत जवान होती हैउस एक पल का तुझे इंतज़ार है कि नहीं
तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया कोतुझे भी अपने पे ये ऐतबार है कि नहीं
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh