ग़ज़ल

ऐ सबा! लौट के किस शहर से तू आती है?

कैफ़ी आज़मी · सब कलाम देखें
ऐ सबा! लौट के किस शहर से तू आती है?तेरी हर लहर से बारूद की बू आती है!
खून कहाँ बहता है इन्सान का पानी की तरहजिस से तू रोज़ यहाँ करके वजू आती है?
धाज्जियाँ तूने नकाबों की गिनी तो होंगीयूँ ही लौट आती है या कर के रफ़ू आती है?
अपने सीने में चुरा लाई है किसे की आहेंमल के रुखसार पे किस किस का लहू आती है!
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