ग़ज़ल
काम आखि़र जज्बा-ए-बेइख्तियार आ ही गया
काम आख़िर जज़्बा-ए-बेइख़्तियार आ ही गयादिल कुछ इस सूरत तड़पा उनको प्यार आ ही गया
जब निगाहें उठ गईं अल्लाह री मे’राजे-शौक़देखता क्या हूँ वो जाने-इन्तिज़ार आ ही गया
हाय ये हुस्न-ए-तस्व्वुर का फ़रेब-ए-रंग-ओ-बूमैंने समझा जैसे वो जाने बहार आ ही गया
हाँ, सज़ा दे ऎ खु़दा-ए-इश्क़ ऎ तौफ़ीक़-ए-ग़मफिर ज़ुबान-ए-बेअदब पर ज़िक्र-ए-यार आ ही गया
इस तरहा हूँ किसी के वादा-ए-फ़रदा पे मैंदर हक़ीक़त जैसे मुझको ऐतबार आ ही गया
हाय, काफ़िर दिल की ये काफ़िर जुनूँ अंगेज़ियाँतुमको प्यार आए न आए, मुझको प्यार आ ही गया
जान ही दे दी ` जिगर' ने आज पा-ए-यार परउम्र भर की बेक़रारी को क़रार आ ही गया
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