ग़ज़ल

दिल को जब दिल से राह होती है

जिगर मुरादाबादी · सब कलाम देखें
दिल को जब दिल से राह होती हैआह होती है वाह होती है
इक नज़र दिल की सिम्त देख तो लोकैसे दुनिया तबाह होती है
हुस्न-ए-जानाँ की मन्ज़िलों को न पूछहर नफ़स एक राह होती है
क्या ख़बर थी कि इश्क़ के हाथोंऐसी हालत तबाह होती है
साँस लेता हूँ दम उलझता हैबात करता हूँ आह होती है
जो उलट देती है सफ़ों के सफ़ेइक शिकस्ता-सी आह होती है
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