ग़ज़ल

इश्क़ में लाजवाब हैं हम लोग

जिगर मुरादाबादी · सब कलाम देखें
इश्क़ में लाजवाब हैं हम लोगमाहताब आफ़ताब हैं हम लोग
गर्चे अहल-ए-शराब हैं हम लोगये न समझो ख़राब हैं हम लोग
शाम से आ गये जो पीने परसुबह तक आफ़ताब हैं हम लोग
नाज़ करती है ख़ाना-वीरानीऐसे ख़ाना- ख़राब हैं हम लोग
तू हमारा जवाब है तनहाऔर तेरा जवाब हैं हम लोग
ख़ूब हम जानते हैं क़द्र अपनीकितने नाकामयाब हैं हम लोग
हर हक़ीक़त से जो गुज़र जायेँवो सदाक़त-म'आब हैं हम लोग
जब मिली आँख होश खो बैठेकितने हाज़िर-जवाब हैं हम लोग
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