ग़ज़ल
ओस पदे बहार पर आग लगे कनार में
ओस पदे बहार पर आग लगे कनार मेंतुम जो नहीं कनार में लुत्फ़ ही क्या बहार में
उस पे करे ख़ुदा रहम गर्दिश-ए-रोज़गार मेंअपनी तलाश छोड़कर जो है तलाश-ए-यार में
हम कहीं जानेवाले हैं दामन-ए-इश्क़ छोड़करज़ीस्त तेरे हुज़ूर में, मौत तेरे दयार में
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