ग़ज़ल

जह्ले-ख़िरद ने दिन ये दिखाए

जिगर मुरादाबादी · सब कलाम देखें
जह्ले-ख़िरद ने दिन ये दिखाएघट गए इन्साँ बढ़ गए साए
हाय वो क्योंकर दिल बहलाएग़म भी जिसको रास न आए
ज़िद पर इश्क़ अगर आ जाएपानी छिड़के , आग लगाए
दिल पे कुछ ऐसा वक़्त पड़ा हैभागे, लेकिन राह न पाए
कैसा मजाज़ और कैसी हक़ीक़तअपने ही जल्वे अपने ही साए
कारे- ज़माना जितना- जितनाबनता जाए बिगड़ता जाए
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