ग़ज़ल

इश्क़ को बे-नक़ाब होना था

जिगर मुरादाबादी · सब कलाम देखें
इश्क़ को बे-नक़ाब होना थाआप अपना जवाब होना था
तेरी आँखों का कुछ क़ुसूर नहींहाँ मुझी को ख़राब होना था
दिल कि जिस पर हैं नक़्श-ए-रंगारंगउस को सादा किताब होना था
हमने नाकामियों को ढूँढ लियाआख़िर इश्क कामयाब होना था
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