ग़ज़ल
जिस दिल को तुमने देख लिया दिल बना दिया
लाखों में इंतिख़ाब के क़ाबिल बना दियाजिस दिल को तुमने देख लिया दिल बना दिया
पहले कहाँ ये नाज़ थे, ये इश्वा-ओ-अदादिल को दुआएँ दो तुम्हें क़ातिल बना दिया
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh