ग़ज़ल

प्रयाणगीत

जयशंकर प्रसाद · सब कलाम देखें
हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारतीस्वयंप्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारतीअमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़-प्रतिज्ञ सोच लो,प्रशस्त पुण्य पंथ हैं - बढ़े चलो बढ़े चलो।
असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्य दाह-सी।सपूत मातृभूमि के रुको न शूर साहसी।अराति सैन्य सिंधु में - सुबाड़वाग्नि से जलो,प्रवीर हो जयी बनो - बढ़े चलो बढ़े चलो।
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