नज़्म
तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी
तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी, हैरान हूँ मैंओ हैरान हूँ मैंतेरे मासूम सवालों से परेशान हूँ मैंओ परेशान हूँ मैं
जीने के लिए सोचा ही नहीं, दर्द सँभालने होंगेमुस्कुराएँ तो, मुस्कुराने के क़र्ज़ उतारने होंगेमुस्कुराऊँ कभी तो लगता है जैसे होठों पे क़र्ज़ रखा हैतुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी, हैरान हूँ मैंओ हैरान हूँ मैं