ग़ज़ल

चौदहवीं रात के इस चाँद तले

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चौदहवीं रात के इस चाँद तलेसुरमई रात में साहिल के क़रीबदूधिया जोड़े में आ जाए जो तूईसा के हाथ से गिर जाए सलीबबुद्ध का ध्यान चटख जाए ,कसम सेतुझ को बर्दाश्त न कर पाए खुदा भी
दूधिया जोड़े में आ जाए जो तूचौदहवीं रात के इस चाँद तले !
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