ग़ज़ल
चलो ना भटके
चलो ना भटकेलफ़ंगे कूचों मेंलुच्ची गलियों केचौक देखेंसुना है वो लोगचूस कर जिन को वक़्त नेरास्तें में फेंका थसब यहीं आके बस गये हैंये छिलके हैं ज़िन्दगी केइन का अर्क निकालोकि ज़हर इन कातुम्हरे जिस्मों मेंज़हर पलते हैंऔर जितने वो मार देगाचलो ना भटकेलफ़ंगे कूचों में
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