ग़ज़ल

सांई सब संसार में

गिरिधर कविराय · सब कलाम देखें
सांई सब संसार में, मतलब को व्यवहार।जब लग पैसा गांठ में, तब लग ताको यार॥
तब लग ताको यार, यार संगही संग डोलैं।पैसा रहा न पास, यार मुख से नहिं बोलैं॥
कह 'गिरिधर कविराय जगत यहि लेखा भाई।करत बेगरजी प्रीति यार बिरला कोई सांई॥
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