ग़ज़ल
साईं तहां न जाइये
साईं तहां न जाइये जहां न आपु सुहायवर्ण विषै जाने नहीं, गदहा दाखै खाय
गदहा दाखै खाय गऊ पर दृष्टि लगावैसभा बैठि मुसकयाय यही सब नृप को भावै
कह गिरिधर कविराय सुनो रे मेरे भाईजहां न करिये बास तुरत उठि अईये साईं
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