ग़ज़ल
झूठा मीठे वचन कहि
झूठा मीठे वचन कहि, ॠण उधार ले जाय।लेत परम सुख उपजै, लैके दियो न जाय॥
लैके दियो न जाय, ऊँच अरु नीच बतावै।ॠण उधार की रीति, मांगते मारन धावै॥
कह गिरिधर कविराय, जानी रह मन में रूठा।बहुत दिना हो जाय, कहै तेरो कागज झूठा॥
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