ग़ज़ल
साईं अपने भ्रात को
साईं अपने भ्रात को, कबहुं न दीजै त्रासपलक दूर नहिं कीजिये, सदा राखिये पास
सदा राखिये पास, त्रास कबहूं नहिं दीजैत्रास दियो लंकेश, ताहि की गति सुन लीजै
कह गिरिधर कविराइ, राम सों मिलियो जाईपाय विभीषण राज, लंकपति बाजयो साईं
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