ग़ज़ल
बिना विचारे जो करै
बिना विचारे जो करै, सो पाछे पछिताय।काम बिगारै आपनो, जग में होत हंसाय॥
जग में होत हंसाय, चित्त चित्त में चैन न पावै।खान पान सन्मान, राग रंग मनहिं न भावै॥
कह 'गिरिधर कविराय, दु:ख कछु टरत न टारे।खटकत है जिय मांहि, कियो जो बिना बिचारे॥
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh