ग़ज़ल

बीती ताहि बिसारि दे

गिरिधर कविराय · सब कलाम देखें
बीती ताहि बिसारि दे, आगे की सुधि लेइ।जो बनि आवै सहज में, ताही में चित देइ॥
ताही में चित देइ, बात जोई बनि आवै।दुर्जन हंसे न कोइ, चित्त मैं खता न पावै॥
कह 'गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती।आगे को सुख समुझि, होइ बीती सो बीती॥
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