ग़ज़ल

साईं घोड़े आछतहि

गिरिधर कविराय · सब कलाम देखें
साईं घोड़े आछतहि गदहन आयो राजकौआ लीजै हाथ में दूरि कीजिये बाज
दुरी कीजिये बाज राज पुनि ऐसो आयोसिंह कीजिये कैद स्यार गजराज चढायो
कह गिरिधर कविराय जहाँ यह बूझि बधाईतहां न कीजै भोर साँझ उठि चलिए साईं
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