ग़ज़ल

सांई अवसर के परे

गिरिधर कविराय · सब कलाम देखें
सांई अवसर के परे, को न सहै दु:ख द्वंद।जाय बिकाने डोम घर, वै राजा हरिचंद॥
वै राजा हरिचंद, करैं मरघट रखवारी।धरे तपस्वी वेष, फिरै अर्जुन बलधारी॥
कह 'गिरिधर कविराय, तपै वह भीम रसोई।को न करै घटि काम, परे अवसर के साई॥
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