ग़ज़ल

छिड़ गये साज़े-इश्क़ के गाने

फ़िराक़ गोरखपुरी · सब कलाम देखें
छिड़ गये साज़े-इश्क़ के गानेखुल गये ज़िन्दगी के मयख़ाने
आज तो कुफ़्र-ए-इश्क़ चौंक उठाआज तो बोल उठे हैं दीवाने
कुछ गराँ हो चला है बारे-नशातआज दुखते हैं हुस्न के शाने
बाद मुद्दत के तेरे हिज्र में ‍फि‍रआज बैठा हूँ दिल को समझाने
हासिले-हुस्नो-इश्क़ बस है यहीआदमी आदमी को पहचाने
तू भी आमादा-ए-सफ़र हो 'फ़िराक़'काफ़िले उस तरफ़ लगे जाने
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