ग़ज़ल
तहों में दिल के जहां कोई वारदात हुई
तहों में दिल के जहां कोई वारदात हुईहयाते-ताज़ा से लबरेज़ कायनात हुई
तुम्हीं ने बाएसे-ग़मबारहा किया दरयाफ़्तकहा तो रूठ गये यह भी कोई बात हुई
हयात राज़े-सुकूँ पा गयी अजल ठहरीअजल में थोड़ी-सी लर्ज़िश हुई हयात हुई
थी एक काविशे-बेनाम दिल में फ़ितरत केसिवा हुई तो वही आदमी की ज़ात हुई
बहुत दिनों में महब्ब़त को यह हुआ मालूमजो तेरे हिज़्र में गुज़री वो रात रात हुई
'फ़िराक़' को कभी इतना ख़मोश देखा थाज़रूर ऐ निगहे-नाज़ कोई बात हुई
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