ग़ज़ल

इस सुकूते ‍फ़िज़ा में खो जाएं

फ़िराक़ गोरखपुरी · सब कलाम देखें
इस सुकूते-फ़िज़ा में खो जाएंआसमानों के राज़ हो जाएं
हाल सबका जुदा-जुदा ही सहीकिस पे हँस जाएं किस पे रो जाएं
राह में आने वाली नस्लों केख़ैर कांटे तो हम न बो जाएं
ज़िन्दगी क्या है आज इसे ऐ दोस्तसोच लें और उदास हो जाएं
रात आयी 'फ़ि‍राक़' दोस्त नहींकिससे कहिए कि आओ सो जाएं
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