ग़ज़ल
इश्क़ मिन्नतकशे-क़रार नहीं
इश्क़ मिन्नतकशे-क़रार नहींहुस्न मज़बूरे-इंतज़ार नहीं
तेरी रंजिश की इंतिहा मालूमहसरतों का मिरी शुमार नहीं
अपनी नज़रें बिखेर दे साक़ीमय बअंदाज़ः-ए-ख़ुमार नहीं
ज़ेरे-लब है अभी तबस्सुमे-दोस्तमुन्तशिर जल्वः-ए-बहार नहीं
अपनी तकमील कर रहा हूँ मैंवरनः तुझसे तो मुझको प्यार नहीं
चारः-ए-इंतज़ार कौन करेतेरी नफ़रत भी उस्तवार नहीं
'फ़ैज़' ज़िंदा रहें वो हैं तो सहीक्या हुआ गर वफ़ाशेआ'र नहीं
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