ग़ज़ल
ईन्तेसाब - आज के नाम
इन्तेसाबआज के नाम
आज के नामऔरआज के ग़म के नामआज का ग़म कि है ज़िन्दगी के भरे गुलसिताँ से ख़फ़ाज़र्द पत्तों का बनज़र्द पत्तों का बन जो मेरा देस हैदर्द का अंजुमन जो मेरा देस हैकिलर्कों की अफ़सुर्दा जानों के नामकिर्मख़ुर्दा दिलों और ज़बानों के नामपोस्ट-मैंनों के नामटांगेवालों के नामरेलबानों के नामकारख़ानों के भोले जियालों के नामबादशाह्-ए-जहाँ, वालि-ए-मासिवा, नएबुल्लाह-ए-फ़िल-अर्ज़, दहकाँ के नाम
जिस के ढोरों को ज़ालिम हँका ले गएजिस की बेटी को डाकू उठा ले गएहाथ भर ख़ेत से एक अंगुश्त पटवार ने काट ली हैदूसरी मालिये के बहाने से सरकार ने काट ली हैजिस के पग ज़ोर वालों के पाँवों तलेधज्जियाँ हो गई हैं
उन दुख़ी माँओं के नामरात में जिन के बच्चे बिलख़ते हैं औरनींद की मार खाए हुए बाज़ूओं से सँभलते नहींदुख बताते नहींमिन्नतों ज़ारियों से बहलते नहीं
उन हसीनाओं के नामजिनकी आँखों के गुलचिलमनों और दरिचों की बेलों पे बेकार खिल-खिल केमुर्झा गये हैंउन ब्याहताओं के नामजिनके बदनबेमोहब्बत रियाकार सेजों पे सज-सज के उकता गए हैंबेवाओं के नामकतड़ियों और गलियों, मुहल्लों के नामजिनकी नापाक ख़ाशाक से चाँद रातोंको आ-आ के करता है अक्सर वज़ूजिनकी सायों में करती है आहो-बुकाआँचलों की हिनाचूड़ियों की खनककाकुलों की महकआरज़ूमंद सीनों की अपने पसीने में जलने की बू
पड़नेवालों के नामवो जो असहाब-ए-तब्लो-अलमके दरों पर किताब और क़लमका तकाज़ा लिये, हाथ फैलायेपहुँचे, मगर लौट कर घर न आयेवो मासूम जो भोलेपन मेंवहाँ अपने नंहे चिराग़ों में लौ की लगनले के पहुँचे जहाँबँट रहे थे घटाटोप, बे-अंत रातों के सायेउन असीरों के नामजिन के सीनों में फ़र्दा के शबताब गौहरजेलख़ानों की शोरीदा रातों की सर-सर मेंजल-जल के अंजुम-नुमाँ हो गये हैं
आनेवाले दिनों के सफ़ीरों के नामवो जो ख़ुश्बू-ए-गुल की तरहअपने पैग़ाम पर ख़ुद फ़िदा हो गये हैं...................................................................
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